रं देश में-धारचूला (ओम पर्वत यात्रा भाग2)
धारचूला में आपका स्वागत है:- सबसे पहले अपने सहयात्रियों से परिचय करा देता हूं। पहाड़,नदी,हवा,घाटी....सब सहयात्री ही तो रहे हैं।जब कभी रूक ही जाने का मन हुआ तो बहती नदी कहती रही...बहते रहो...चलते रहो।हौसला कमजोर पड़ने लगा तो पर्वतों के हिमाच्छादित उत्तुंग शिखर मनोबल को साधते रहे... रवि भैया,रिया भाभी,लिटिल मास्टर मिहिर,और 'सख्त लौन्डा' कपिल जंगपांगी पथ के साथी रहे। रवि भैया...इस यात्रा के संयोजक,प्रबंधक,खजांची...बोले तो ऑल इन वन।सौम्य व्यवहार,किंतु आवश्यकता पड़ने पर रौद्र रूप भी धारण कर सकते है।इस रूप के दर्शन लौटते हुए समय होंगे।रवि भैया मूलतः भरतपुर के ही हैं।वर्तमान में गुरुग्राम में बैंकर हैं। रिया भाभी...बिल्कुल बड़ी बहन जैसी केयरिंग। एक आदर्श भारतीय नारी। आप साथ ना होतीं तो डोंगचू थुकचू फलानाचू ढिमकाचू भूखा ही मार देते। और चावल के परांठे....क्या कहा? चावल के कैसे परांठे? तनिक धैर्य धारण करिए खिलाएंगे; वो भी रिया भाभी के हाथ के,याक के घी में बने हुए। मिहिर...इसके छोटे आकार पर मत जाईएगा। "देख...