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रं देश में-धारचूला (ओम पर्वत यात्रा भाग2)

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धारचूला में आपका स्वागत है:- सबसे पहले अपने सहयात्रियों से परिचय करा देता हूं। पहाड़,नदी,हवा,घाटी....सब सहयात्री ही तो रहे हैं।जब कभी रूक ही जाने का मन हुआ तो बहती नदी कहती रही...बहते रहो...चलते रहो।हौसला कमजोर पड़ने लगा तो पर्वतों के हिमाच्छादित उत्तुंग शिखर मनोबल को साधते रहे...            रवि भैया,रिया भाभी,लिटिल मास्टर मिहिर,और 'सख्त लौन्डा' कपिल जंगपांगी पथ के साथी रहे। रवि भैया...इस यात्रा के संयोजक,प्रबंधक,खजांची...बोले तो ऑल इन वन।सौम्य व्यवहार,किंतु आवश्यकता पड़ने पर रौद्र रूप भी धारण कर सकते है।इस रूप के दर्शन लौटते हुए समय होंगे।रवि भैया मूलतः भरतपुर के ही हैं।वर्तमान में गुरुग्राम में बैंकर हैं।   रिया भाभी...बिल्कुल बड़ी बहन जैसी केयरिंग। एक आदर्श भारतीय नारी। आप साथ ना होतीं तो डोंगचू थुकचू फलानाचू ढिमकाचू भूखा ही मार देते। और चावल के परांठे....क्या कहा? चावल के कैसे परांठे? तनिक धैर्य धारण करिए खिलाएंगे; वो भी रिया भाभी के हाथ के,याक के घी में बने हुए।   मिहिर...इसके छोटे आकार पर मत जाईएगा। "देख...

मणिमहेश यात्रा मार्गदर्शन

इस वर्ष 24 अगस्त2019 से 6 सितम्बर के मध्य मणिमहेश कैलास यात्रा का आयोजन हो रहा है। हम पिछले साल इस यात्रा पर गये थे।बहुत मित्रों द्वारा इस यात्रा संबंधी जानकारी चाही गई है।उनके व...

रं देश में (ओम पर्वत/आदि कैलास यात्रा वृत्तांत)

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भाग 1:या त्रा मार्गदर्शिका पिछले साल 2018 में मणिमहेश कैलास दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ था।अब अगले वर्ष 2019 में शेष 4 कैलासों में से कौनसे कैलास पर्वत के दर्शन किये जाएं? यह बहुत समय तक अनिश्चित ही रहा।मन कहता श्रीखंड या किन्नर कैलास चला जाए और तन कहता बेटा ये चढ़ाई फिलहाल तेरे बस की नहीं। कैलास मानसरोवर के लिए समय व बजट नहीं।आदि कैलास यात्रा भी जटिल व लम्बी यात्रा है। तो अनंतिम निश्चय किया कि किन्नर कैलास जटिल तो है किन्तु 18-20 किमी का ट्रेक है,अतः पूरी जान झोंककर एक संभावना बनती है।       एक दिन फेसबुक पर एक मित्र का आदि कैलास/ऊँ पर्वत यात्रा वर्णन पोस्ट हुआ।पूरा वृत्तांत तुरंत ही निपटा डाला एवं आदि कैलास/ऊँ पर्वत यात्रा का त्वरित अंतिम निश्चय हो गया।    लगभग 100 संभावित यात्रियों का एक व्हाट्सऐप समूह भी बन गया।अप्रेल में प्राथमिक तौर पर निश्चय हुआ कि 31मई को धारचूला पहुंचा जाए,1 जून को इनरलाईन परमिट मिल जायेगा तत्पश्चात 2 जून से यात्रा प्रारंभ एवं 13,14 जून तक यात्रा संपन्न हो जाएगी।मेंने रानीखेत एक्सप्रेस की बांदीकुई से काठगोदाम की 29जून...

बटेसरः खंडहरों का पुनर्जन्म

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बटेसरः 200 मंदिरों की पुनर्जन्म कथा                    पूर्व व सृजन के पश्चात वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नोरोपणानि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्य न्यानि संयाति नवानि देहि।। ( श्रीमद्भगवद्गीता) (अर्थात जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस् त्र त्याग कर नवीन वस् त्र धारण करता  है उसी प्रकार आत्मा पुराने व व्यर्थ शरीर को त्याग कर नवीन भौतिक देह धारण करती है।) पुनर्जन्म सत्य है अथवा असत्य? दिनांक 18/04/2019 को की गई एक यात्रा ने मेरे पुनर्जन्म संबंधी मत को प्रगाढ़ कर दिया।ये यात्रा थी मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पढ़ावली गाँव के दक्षिण-पश्चिम में एक पहाड़ी की विस्तृत उपत्यका में स्थित बटेसर मंदिर समूह की।आप भले ही पुनर्जन्म संबंधी मान्यता से असहमत हों,बटेसर मंदिर समूह आपके मत को बदलने का माद्दा रखते हैं।जब आप यहाँ शिव मंदिर समूह के पुनर्जन्म का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे तो संभवतः आप भी श्रीमद्भगवद्गीता के उपर्युक्त श्लोक से एकमत हो जाएं।      बटेसर मंदिर स्थापत्य कला की दृष्टि से प...

*मणिमहेश कैलास यात्रा*

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       मणिमहेश यात्रा(भाग4)        (हड़सर से गौरीकुंड,मणिमहेश)        दिनांक:- 16/09/2018                       मैं सुबह सबसे पीछे उठा।ऊपर लंगर वालों ने नहाने के लिये गर्म पानी किया हुआ था।हमने सुबह 7 बजे नहा व नाश्ता कर यात्रा प्रारंभ कर दी।प्रजापत जी हमसे लगभग आधा घंटा पहले निकल लिये थे।बैग को 50₹ में एक दुकान पर पहले ही रख दिया था। लैंडस्लाइड के कारण यात्रा के लिये नीचे कुगती मार्ग से नया रास्ता बनाया गया है।यात्रा का मार्ग मणिमहेश गंगा के साथ साथ आगे बढ़ता है।शुरुआत के 15-20 मिनिटों में ही मुझे यात्रा की कठिनाई का पूर्वाभास हो गया।हड़सर (2200मीटर)से मणिमहेश(4500मीटर) लगभग 14किमी दूर है।इस 14किमी के फासले में लगभग 2300मीटर की ऊँचाई ऊबड-खाबड मार्ग पर चढ़नी होती है।थोडा आगे चलने पर हडसर की तरफ एक हिमाच्छादित शुभ्र शिखर दिखाई पड़ा जिस पर सूर्य-रश्मियाँ टकरा कर चहुंओर बिखर रही थीं।    'दुनाली' नामक स्थान पर एक लंगर लगा हुआ था।हालांकि मेरा पेट खराब था परन्तु ऊँ...

मणिमहेश कैलास चंबा

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मणिमहेश यात्रा (भाग 3) दिनांक:- 15/09/2018  नैनी खड्ड से आगे बढ़ने पर ऊँचाई बढ़ती जाती है व पर्वतों के ढलानों पर चीड़ व देवदार के वृक्षों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि होती जाती है।रास्ते में एक जगह लेंडस्लाइड़ वाला वह स्थान भी मिलता है जो कुछ दिन पूर्व टी.वी न्यूज में दिखाया जा रहा था।जहाँ हम लोगों के लिये लैंडस्लाईड भय का विषय है वहीं दूसरी ओर यह पहाडी लोगों की दैनिक जीवनचर्या में सम्मिलित है।बस में अधिकांश मणिमहेश जाने वाले यात्री ही बैठे थे।इनमें से कुछ पूर्व में यह यात्रा कर चुके हैं,वो अपने अनुभव साझा कर रहे थे।लगभग घंटे भर के बाद बस "बनिखेत" पहुंचती है।डलहौजी में पर्यटक अतिभारण के कारण बनिखेत में होटल उद्योग ने विशाल रूप ले लिया है।बनिखेत से दाँयी तरफ डलहौजी के लिये रास्ता गया है जो खज्जियार होते हुए चंबा को भी निकल जाता है।खज्जियार से एक रास्ता "चुवाडी" के लिये भी निकलता है,जिससे धर्मशाला जाया जा सकता है।  हमारी बस डलहौजी मोड़ पर सवारी उतारने व सवारी लेने के लिये रुकती है।हमारी बस से पहली वाली बस के ब्रेकडाउन होने के कारण यहाँ बहुत लोग खड़े मिलते हैं ज...

मणिमहेश कैलास यात्रा

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 *मणिमहेश* :-प्रकृति की गोद में (भाग2) दिनांक 15/09/2018 सुबह जल्द ही नींद खुल गयी,वैसे भी घर के अतिरिक्त अन्य स्थान पर मुझे गहरी नींद आती भी नहीं है।अतुल भाई साब अल-सुबह ही बोगी के शौचालयों का निरीक्षण कर आये थे,जोकि अन्दर घुसने लायक स्थिति में भी नहीं थे।   हम भारतीय अत्यल्प सुविधाओं में बसर करने के अभ्यस्त होते हैं। ये भी कहा जा सकता है कि हमें सरकारी सुविधाओं को अविवेकपूर्ण दोहन द्वारा अत्यल्प सुविधाओं में परिवर्तित करने में महारत हासिल है। खैर पठानकोट पहुंच कर ही शौचादि से निवृत होने का विचार किया।सुबह जागने पर हम पंजाब में थे।पंजाब कृषि की दृष्टि से भारत का प्रमुख प्रांत है।यहाँ खरीफ में धान की फसल प्रमुखता से बोई जाती है।पठानकोट तक सतलुज, व्यास व चक्की नदी को पार करना पड़ता है। साथ वाली बर्थों पर बैठे खंडवा(म.प्र) के किसी गाँव के कुछ परिवार वैष्णोदेवी यात्रा के लिये जा रहे थे।अगर सहयात्रियों से वार्तालाप प्रारंभ करना हो तो वर्तमान राजनीति पर थोड़ी चर्चा प्रारंभ कर दीजिये;शीघ्र ही उनके अन्दर का सुकरात,लेनिन या कार्ल मार्क्स आदि बाहर निकल आता है।आपको उनके विचारों से ...